
सात सालों से दफ़्तर की चक्की में पिस रही चा जी-यून अब नौकरी और डेटिंग, दोनों से थक चुकी है। उसकी मुलाक़ात अपने सख्त मिज़ाज बॉस कांग सी-वू से होती है, जिसका खौफ़ पूरे दफ़्तर में मशहूर है। उसकी कड़वी बातों के पीछे छिपी नरमी जी-यून की बुझी ज़िंदगी में फिर से जान फूँक देती है। रोज़ की भाग-दौड़, दफ़्तर के हादसों और नाकाम रिश्तों के बीच, ये दोनों एक-दूसरे का बेबदल सहारा बन जाते हैं।